झूठ की हम तो वकालत नहीं करने वाले

सच-बयानी से हिक़ारत नहीं करने वाले

ज़ख़्म उल्फ़त में कई खाए हैं हम ने सो अभी
एक -दो उम्र मुहब्बत नहीं करने वाले

राजगद्दी के लिए करते फिरें ज़ुल्म-ओ-सितम
हम यूँ गंदी तो सियासत नहीं करने वाले

मुल्क की खा के जो गाते हैं पड़ोसी की मियाँ
उन की जुर्रत पे इनायत नहीं करने वाले

उन का कहना है कि वो हैं तो वतन के रहबर
मज़हबी जंग में शिरकत नहीं करने वाले

मौत आई तो उसे नित्य लगा लेंगे गले
डर के मारों की सी हरकत नहीं करने वाले

— Nityanand Vajpayee

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