ज़ियादा हम को समझाना नहीं है
हुनर अपना ये दिखलाना नहीं है
वतन के वास्ते जीना है आसाँ
बशर्ते ग़म से घबराना नहीं है
सभी की यादों में ज़िंदा रहोगे
फ़क़त बेकस को ठुकराना नहीं है
तुम्हारी उलझनें भी कम रहेंगी
किसी बेबस को उलझाना नहीं है
अदद भर दुश्मनों की बेरुख़ी से
हमें भी हार कर जाना नहीं है
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