कोई मुझ को मेरा भरपूर सरापा ला दे

मेरे बाज़ू मेरी आँखें मेरा चेहरा ला दे

ऐसा दरिया जो किसी और समुंदर में गिरे
इस से बेहतर है कि मुझ को मेरा सहरा ला दे

नया मौसम मेरी बीनाई को तस्लीम नहीं
मेरी आँखों को वही ख़्वाब पुराना ला दे

कुछ नहीं चाहिए तुझ से मेरी ऐ उम्र-ए-रवाँ
मेरा बचपन मेरे जुगनू मेरी गुड़िया ला दे

कश्ती-ए-जाँ तो भँवर में है कई बरसों से
ऐ ख़ुदा अब तो डुबो दे या किनारा ला दे

— Noshi Gilani

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