नूर ग़ाफ़िल हुआ लौ बुझाए बग़ैरलड़खड़ाए क़दम हैं पिलाए बग़ैरकर दिया ग़ैर फ़ेहरिस्त में मुत्तहिदहो गए दूर वो आज़माए बग़ैरइश्क़ है तो सनम सब्र भी कर लियातिलमिलाते हैं आँसू बहाए बग़ैरमान जाते बड़ी शख़्सियत आप कीक्या कभी की मदद यूँ जताए बग़ैर— Roza Ahmad 'Aawaaz'