तन्हाई सहन के पार हो रही है
ये ज़िंदगी अदाकार हो रही है
ये कैफ़ियत हुई है अजीब जब से
तकलीफ़ भी बहुत यार हो रही है
सिगरेट और तुम याद आ रहे हो
हाँ रूह अब तलबगार हो रही है
लड़की जिसे सदा भीड़ रास आईं
तन्हाई में गिरफ़्तार हो रही है
आवाज़ ज़िन्दगी ख़त्म कब हो जाए
ये मौत से भी दो चार हो रही है
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