यार पहले ये ग़म विदा कर दोफिर चलो दूर-अज़-दवा कर दोरास आती नहीं मुहब्बत अबमामला ये रफ़ा-दफ़ा कर दोख़्वाहिशें जो रखी मियाँ ऊँचीसादगी को ज़रा जुदा कर दोभीड़ से कुछ हुआ नहीं हासिलख़ुद से ख़ुद के लिए दुआ कर दो— Roza Ahmad 'Aawaaz'