सस्ते के चक्कर में महँगा खोया है
सोने की चाहत में हीरा खोया है
सब कहते हैं इज़्ज़त खोई है उस ने
वैसे उस ने सिर्फ़ दुपट्टा खोया है
झांग अकेला तू ने ही खोया है क्या
मैं ने भी तो तख़्त हज़ारा खोया है
जो सरदार पड़ा रहता है कोठे पर
उस ने अपना सारा रकबा खोया है
हर दरिया के जल से बादल बनते हैं
हर दरिया ने अपना बेटा खोया है
— Piyush Paiham














