आँख में रह जाएगा जब इक नजारा देर तक
दो किनारें भी लगेंगी इक किनारा देर तक
ईश्क़ को वैसे भी मैं ने समझा काफ़ी देर से
दोस्ती लगती रही उस का इशारा देर तक
देखता था ऐसे मुझ को रात भर वो प्यार से
जैसे कोई देखता हो एक सितारा देर तक
आ रहीं यादों के तूफ़ाँ में समुंदर तक चलें
आ
समाँ में तैरता जैसे गुबारा देर तक
आदमी जबतक उतर पाया नहीं था चाँद पर
चाँद बनकर रह गया था इस्तिआरा देर तक
— Praveen Bhardwaj















