अगर कुछ बच गया है तो जला दो
लगाओ आग दिल में और सज़ा दो
हमीं पर चल रही हैं चारा-साज़ी
दवा तो मिल रही है बस दुआ दो
कहेगा क्या ज़माना ये न सोचो
अभी भी चाहते हो तो बता दो
बराबर जुर्म है ये भी समझ लो
गले पर हाथ डालो या दबा दो
कभी ख़्वाहिश दिलों की मत दबाना
अगर थोड़ी बची हो तो हवा दो
अगर सच कह रहे हो तो न डरना
सभी को आइना आओ दिखा दो
ये कैसी यार बातें कर रहे हो
हमें तुम रोक लो या रास्ता दो
— Praveen Bhardwaj















