कोई परिंदा जैसे पानी में नहीं रहता
वैसे होश भी जवानी में नहीं रहता
कुल मिलाकर कुछ किताबें हैं कमरे में
इस लिए मैं कभी निगरानी में नहीं रहता
कुछ छूट जाती हैं हक़ीक़त कहानी में
हर एक किरदार कहानी में नहीं रहता
एक सुकून हैं इस फ़क़ीरी में भी यारों
एक सुकून जो बेईमानी में नहीं रहता
हरा जंगल भी जल उठता हैं ग़ुस्से में
इस से ज़्यादा कोई रवानी में नहीं रहता
उम्र से ज़्यादा एक दिन भी नहीं माँगता
मैं किसी की मेहरबानी में नहीं रहता
— Praveen Bhardwaj















