हो गई नस्ल नाश लोगों कीथम गई है तलाश लोगों कीमर चुका है ज़मीर लोगों काबात करती है लाश लोगों कीशा'इरी क्या है यूँ समझ लो तुमज़िंदगी है हताश लोगों कीजाने कब बोल पाएँगे ये लोगकब मिटेगी ख़राश लोगों कीबेख़ुदी ख़त्म हो किसी सूरतआँख खुल जाए क़ाश लोगों की— Raaz Gurjar