यार कोई तो मसअला होगाअश्क यूँॅं ही नहीं गिरा होगामैं जो हूँ मैं वो हूँ नहीं शायदमेरे अंदर कोई छुपा होगाआख़िरश जान ही तो जाएगीइस से ज़्यादा तो और क्या होगाजिस्म है इक मकान के मानिंदआज ये कल को दूसरा होगाआदमी जब नहीं रहे होंगेतब ख़ुदा एक ही रहा होगा— Raaz Gurjar