जीत जाऊंँ मैं अब की चल दो गोट जानेमन
दे दो मेरे होंठों पे अपना वोट जानेमन
तुम मेरी मोहब्बत पे क्यों यक़ीं नहीं करते
क्या है मेरी चाहत में कोई खोट जानेमन
तब मज़ा मोहब्बत का मुझको खुल के आएगा
जब उभर के आएगी दिल की चोट जानेमन
मेरे दिल को जब जब भी, कोई चीज़ भाती है
देखता नहीं हूँ मैं फिर तो नोट जानेमन
क्या मुझे समझता है ,हाथ का खिलौना तू
क्या मैं तेरी ख़ातिर हूँ इक रिमोट जानेमन
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