तिरी हर ख़ता भी क़ुबूल है
तिरी तो जफ़ा भी क़ुबूल है
मैं हूँ क़ैद में तेरे प्यार के
मुझे ये सज़ा भी क़ुबूल है
मिरी आदतों में शुमार तू
मुझे ये नशा भी क़ुबूल है
कभी नोंक-झोंक के खेल में
तिरा जीतना भी क़ुबूल है
मिरी आदतें हैं बुरी अग़र
तिरा टोकना भी क़ुबूल है
ज़रा सी मिरी किसी बात पर
तिरा रूठना भी क़ुबूल है
है मिज़ाज तेरा जो गर्म चाय
यही ज़ाइक़ा भी क़ुबूल है
कभी हाँ मिलाना भी है क़ुबूल
कभी डाँटना भी क़ुबूल है
तिरे रिश्ते मेरे भी ज़िम्में हैं
तिरा मायका भी क़ुबूल है
तिरे इश्क़ का जो चढ़ा है रंग
मुझे ये हिना भी क़ुबूल है
तिरा इश्क़ है कोई दरिया तो
मुझे डूबना भी क़ुबूल है
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