चलो तुम्हें तो जुदा करूँँगा
तुम्हारी यादों का क्या करूँगा
क़फ़स नहीं दिल बड़ा करूँगा
मैं पंछियों को रिहा करूँगा
अभी अज़ाब आया ही कहाँ है
अभी तो मैं हौसला करूँगा
अब अपने पास इक मैं ही बचा हूँ
सो ख़ुद से ख़ुद ही मिला करूँगा
मैं ख़ुद भी शामिल हूँ मुश्किलों में
मैं ख़ुद का भी सामना करूँगा
सलीक़े से तो निकाल दिल से
वगरना दिल में चुभा करूँगा
उदास ग़ज़लों उसे लगा था
मैं उस पे नज़्में लिखा करूँगा
मैं ख़्वाब ही बन गया हूँ और अब
बस आँखों में ही रहा करूँगा
— Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'















