पीते हैं नवाबों सा कि जाना भी नहीं हैहम मयकशों का कोई ठिकाना भी नहीं हैतुम भी किसी रजवाड़े की औलाद नहीं होऔर अपना कोई ऐसा घराना भी नहीं है— Rakesh Mahadiuree