दे दो जो देनी है सज़ा मुझ को
पहले कहना मगर ख़ता मुझ को
इसलिए भी मैं आया करता हूँ
है यहाँ कोई जानता मुझ को
उम्र भर आँख भर के जीने का
इश्क़ पर ऐसा है सजा मुझ को
चाल बारिश ने चल दी हैं दोस्त
डर है दिल में मकान का मुझ को
जब समुंदर किनारे बैठा था
कह रहा था कोई बचा मुझ को
एक उसके अलावा तो 'नबराज'
हर कोई कहता है भला मुझ को
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