tamannaa jaag uthatii hai tere kooche men aane se | तमन्ना जाग उठती है तेरे कूचे में आने से

  - Saarthi Baidyanath

तमन्ना जाग उठती है तेरे कूचे में आने से
तेरे चिलमन हटाने से ज़रा सा मुस्कुराने से

'अजब ही दौर था ज़ालिम ग़ज़ल की नब्ज़ चलती थी
मेरी पलकें उठाने से तेरी पलकें झुकाने से

कहीं जाओ मगर अच्छे मकाँ मिलते कहाँ हैं अब
हमारे दिल में आ जाओ ये बेहतर हर ठिकाने से

पतंगों सा गिरा कटकर तेरी छत पर अरे क़ातिल
कि बाहों में उठा ले तू इसी झूठे बहाने से

हमारे नाम से साक़ी सभी को मय पिला देना
सितारे रतजगों के हैं थके-हारे ज़माने से

  - Saarthi Baidyanath

Jhooth Shayari

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