दिल ये बेचैन ठिकाने पे मिरा लग जाए
सारे ज़ख़्मों पे अगर उस का छुआ लग जाए
दिल ये इक बार मिरे साथ लगाकर देखो
फिर ये आसान नहीं मेरे बिना लग जाए
तू मिरे नाम के धागे किसी मंदिर में बाँध
लग नहीं पाई दवा मुझ को दुआ लग जाए
मैं तुझे क़ैद नहीं दुनिया से रखता था दूर
बस नहीं चाहा के दुनिया कि हवा लग जाए
मेरे अश'आर ज़रा तंज़ भरे होते हैं
देखना आप को इस का न बुरा लग जाए
मैं तो बैठा हूँ अभी छोड़ने को ये दुनिया
कोई इक बात मिरे दिल को ज़रा लग जाए
सिलसिला ख़त्म ये हो जाए भटकने वाला
मौत रहती है कहाँ उस का पता लग जाए
— Sagar Sahab Badayuni















