तुम कह रही हो अपनी मुलाक़ात भुला दूँ
या'नी के शुरूआत कि हर बात भुला दूँ
कैसे मैं भुला दूँ वो मिरी ज़िंदगी का दिन
कैसे वो तिरे साथ कि बरसात भुला दूँ
अब तक नहीं भूला हूँ तिरा छोड़ के जाना
इक दिन में तिरी कैसे मैं बारात भुला दूँ
तुम ख़ैर भुला सकती हो ये साथ हमारा
लेकिन मैं सभी कैसे वो जज़्बात भुला दूँ
आँसू भी पिए ख़ून के मरने की दुआ की
सब मिल गया है आज तो हालात भुला दूँ
— Sagar Sahab Badayuni















