'ishq se ham hi agar tauba karenge | 'इश्क़ से हम ही अगर तौबा करेंगे

  - Saheb Shrey

'इश्क़ से हम ही अगर तौबा करेंगे
तो नए आशिक़ भला फिर क्या करेंगे

ज़िंदगी का आख़िरी जो रहगुज़र है
हम वहाँ तक कार का पीछा करेंगे

टाँग दी तस्वीर उसकी आसमाँ में
रात भर अब चाँद हम देखा करेंगे

तब रहेगा हर ज़ुबाँ पर नाम तेरा
लोग जब जब हुस्न की चर्चा करेंगे

ख़्वाब में तुमको गले से हम लगाकर
सुब्ह तक लब पर तेरे बोसा करेंगे

देखना 'साहेब' ये इक रोज़ होगा
सब तख़ल्लुस से तुम्हें जाना करेंगे

  - Saheb Shrey

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