zakhmi veeron ko yaa ghaayal samjha jaata hai | ज़ख़्मी वीरों को याँ घायल समझा जाता है

  - Sandeep dabral 'sendy'

ज़ख़्मी वीरों को याँ घायल समझा जाता है
सारे सुख़न-वरो को पागल समझा जाता है

वो केवल पायल नइँ हैं बेड़ियाँ भी याँ जिनको
दुनिया की नज़रों में पायल समझा जाता है

इक बूँद ही बहुत होती है प्यासे के ख़ातिर
सहरा में कथरी को जंगल समझा जाता है

है शिक्षा का बहुत ज़रूरी क़िरदार ज़ीस्त में
वर्ना दुख़ान को भी बादल समझा जाता है

सूरत कहाँ यहाँ कान तक न देखे हैं उसके
जिसके कानों का याँ कुंडल समझा जाता है

क़ीमत अगर पता होती तो बहने नइँ देते
पर अश्कों को मामूली जल समझा जाता है

न आज तक आया है न वो कभी याँ आएगा
जिसको सबकी भाषा में कल समझा जाता है

  - Sandeep dabral 'sendy'

Aansoo Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Sandeep dabral 'sendy'

As you were reading Shayari by Sandeep dabral 'sendy'

Similar Writers

our suggestion based on Sandeep dabral 'sendy'

Similar Moods

As you were reading Aansoo Shayari Shayari