बहते अश्क याँ दुनिया से छुपाए नइँ जाते
टूटे ख़्वाब पलकों पर फिर सजाए नइँ जाते
दफ़्न जितने रक्खो असरास उतना बेहतर है
सबको राज यूँँ अपने याँ बताए नइँ जाते।
तोड़ने को निस्बत झूठे लगाते हैं इल्ज़ाम,
हम सेे तो किसी पर ऐसे लगाए नइँ जाते।
दिल में घर जो कर जाएँ ऐसे हैं बहुत कम लोग
दिल से उतरे तो फिर जल्दी भुलाए नइँ जाते
मतलबी हैं जो समझाए उन्हें यहाँ अब कौन
याँ चिराग़ आशाओं के बुझाए नइँ जाते
छोटी-छोटी तकरारें आम हैं यहाँ होनी
हर दफ़ा वफ़ा के पौधे उगाए नइँ जाते
हैं गिने चुने मरहम जो लगाते हैं सैंडी'
ज़ख़्म हर किसी को भी तो दिखाए नइँ जाते
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