झूठे दिल का दौर मुबारक
तुम को अब इक और मुबारक
अब तक इतनी बात बनी है
फिर ये ज़ेर-ए-ग़ौर मुबारक
देख गणित का ज्ञाता हूँ मैं
फिर ज़ख़्म-ए- बेतौर मुबारक
— Suraj "pathik"
तुम को अब इक और मुबारक
अब तक इतनी बात बनी है
फिर ये ज़ेर-ए-ग़ौर मुबारक
देख गणित का ज्ञाता हूँ मैं
फिर ज़ख़्म-ए- बेतौर मुबारक
Other ghazal from the same pen
Shers of baaten shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling