रक़्स करते हैं गाने लगते हैंउस गली में जो जाने लगते हैंइस कदर आशिक़ी में डूबा हूँउस के ता'ने तराने लगते हैंतुझ को छू कर के मुसव्विर मेरी जाँअसल तितली बनाने लगते हैंकोई इतना क़रीब रहता हैकी आते आते जमाने लगते हैं— Shaad Imran