bethe rahne se bhala kya mila hai | बेठे रहने से भला क्या मिला है

  - Shaad Imran

बेठे रहने से भला क्या मिला है
ढूंढने वाले को ख़ुदा मिला है

आज इक दरिया ने चीखकर बोला
कोई प्यासा यहॉं डूबा मिला है

वाह रे कर्बला तेरी किस्मत
तुझको हुसैन का सजदा मिला है

जिस्म कि आग बुझाने के लिए
बड़ी मुश्किल से इक कमरा मिला है

वो मुझ सेे इस कदर शर्मा आ रहा है
जैसे कि पहली मर्तबा मिला है

सबके हिस्से में तो चमन आया
मुझको हिस्से में सहरा मिला है

'शाद' तेरी शायरी से लगता है
जख्म तुझको बहुत गहरा मिला है।

  - Shaad Imran

Nadii Shayari

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