आसाँ नहीं है ज़िन्दगी में ऐसे धोके देखना

अपनी मुहब्बत को किसी दूजे का होते देखना

ये दुख किसी का भी सगा नई होता मेरे दोस्त! तुम
इक बार पत्थर दिल किसी इंसां को रोते देखना

मासूम सी बच्ची है वो तो कोई मेरे ख़याल से
जब भी उसे गर देखना हो, यार सोते देखना

उस ने बिछड़ते वक़्त इक तस्वीर दी अपनी, कहा
तुम देखने के आदी हो जब याद आए, देखना

— karan singh rajput

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Gham Shayari

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