सज़्दे में ना दीदार में मारे गए
राही थे हम इंतिज़ार में मारे गए
हम मौत से भी मरने वाले थे कहाँ
बस ये तो तेरे प्यार में मारे गए
उस ने कभी अपना हमें जाना नहीं
जिस के लिए बेकार में मारे गए
हम से मोहब्बत तो कभी हो ना सकी
हम तो यूँ ही तकरार में मारे गए
उस की अदाएँ ऐसी थी कुछ जो मेरे
जैसे भी पहली बार में मारे गए
— karan singh rajput















