होंठों पर है अगर बात कह दीजिए
हो न जाए कहीं रात कह दीजिए
रोकना है भला क्यूँ इन्हें आने से
वो न जाए ये जज़्बात कह दीजिए
मैं अकेला निकल आया हूँ क्या हुआ
आप गर हैं मिरे साथ कह दीजिए
हाल ये देख कर लगता है आप के
मेरे जैसे हैं हालात कह दीजिए
अब किसी बात से उस को डरना नहीं
मेरे हाथों में है हाथ कह दीजिए
आप हँसते है दुनिया मिरी हँसती है
होने लगती है बरसात कह दीजिए
— Shivam Raahi Badayuni















