Shivam Raahi Badayuni

Shivam Raahi Badayuni

@shivambdn09

Shivam Raahi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shivam Raahi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

सफ़र रुक गया और चलने के बा'द बचा ही नहीं घर ये जलने के बा'द — Shivam Raahi Badayuni
कि मुझ से वक़्त ये होकर गुज़र जाए बची है ज़िंदगी रो कर गुज़र जाए — Shivam Raahi Badayuni
अब हम कभी तुम को बुलाएँगे नहीं दिल जो दुखा तुम को बताएँगे नहीं — Shivam Raahi Badayuni
हमें भी मिलने की ख़्वाहिश बहुत है अभी तो शहर में बारिश बहुत है — Shivam Raahi Badayuni
मेरी रातें मुझ को सोने को कहती है उस की यादें मुझ को खोने को कहती हैं — Shivam Raahi Badayuni

Ghazal

कोई तो काम आए अब ख़ुद कुशी हमारी चुभने लगी है हम को ये ज़िंदगी हमारी मालूम ही नहीं था तुझ को ये ग़म हमारा दिल में तड़प रही है क्यूँँ बेख़ुदी हमारी कैसे यक़ीन करता ख़ुद पर यहाँ मैं लोगों हम को जो खा रही थी ये ख़ामुशी हमारी कैसे करें बयाॅं हम ये शब्द में उन्हें अब चरणों में जिन के है अब ये बंदगी हमारी अब ख़ैर मर न जाए आलम है ये हमारा हम ने ये छोड़ दी गर ये शा'इरी हमारी वो एक उम्र से हैं नाराज़ हम से आख़िर हम क्यूँ दिखा न पाए थे सादगी हमारी ख़ुद आप ही लगा लें मिट्टी को हम किनारे देखी न जा सकेगी अब बेबसी हमारी — Shivam Raahi Badayuni
उम्र भर का पीछा परछाई नहीं छोड़ेगी क्या छोड़ भी दे मुझ को तन्हाई नहीं छोड़ेगी क्या बे-सबब उम्मीद ले कर ज़िंदगी आई यहाँ देखना है कोई अच्छाई नहीं छोड़ेगी क्या ख़त्म कर तो दी है उस की याद पर डर है मुझे अब मिरा पीछा ये शहनाई नहीं छोड़ेगी क्या ज़िंदगी करने लगी है मुझ को रुसवा और अब उम्र भर मुझ को ये रुसवाई नहीं छोड़ेगी क्या कब तलक अब राह देखेंगे तुम्हारी टूट कर देखना ये आँख बीनाई नहीं छोड़ेगी क्या है शिकस्त-ए-दिल हमारा जिस तरह बिखरा हुआ ज़ख़्म क्या कोई भी पुरवाई नहीं छोड़ेगी क्या — Shivam Raahi Badayuni
इतना भी इनको तू बेदाद नहीं कर सकता ज़ुल्म इतना कभी सय्याद नहीं कर सकता हम ही करते रहें क्या याद तुझे शब-भर शब ख़ुद कभी क्या तू हमें याद नहीं कर सकता ये सभी ज़ख़्म विरासत में मिले हैं मुझ को मुझ को इस दर्द से आज़ाद नहीं कर सकता ख़ुद ही ख़ुद को मिटा सकता हूँ मैं ऐसे कोई शख़्स कर दे मुझे बर्बाद नहीं कर सकता देख कर हाल बता सकता हूँ वो लड़की है काम ये कोई भी जल्लाद नहीं कर सकता मौत चुंगल है चले जाएँगे जिस में हम सब भीख बस माँग ले फ़रियाद नहीं कर सकता रूह को लिखता है ग़ज़लों में डुबा कर सागर दौर का कोई भी ये उस्ताद नहीं कर सकता — Shivam Raahi Badayuni
किसी क़ीमत तुझे इस दिल में लाने तो नहीं वाला लगा जो दाग़ इस दिल पर है जाने तो नहीं वाला भले ही ख़त्म हो जाए ये क़िस्सा तेरा मेरा अब तिरी तस्वीर को मैं अब जलाने तो नहीं वाला उठाए रखना है ता उम्र मुझ को ख़ामुशी दिल में ख़ुशी का बोझ अब दिल से उठाने तो नहीं वाला भले ही सूख जाए अब मिरी इन आँखों का पानी तिरी ख़ातिर कभी आँसू बहाने तो नहीं वाला तिरी ख़ातिर हुआ है ख़ाक मेरे घर का हर कोना तिरी ख़ातिर कभी घर को सजाने तो नहीं वाला मुझे मालूम होता है तुम्हारा दर्द भी ग़म भी सुनो आँखों तुम्हें मैं अब रुलाने तो नहीं वाला निभा कर साथ मैं उस का बड़ा पछता रहा हूँ अब किसी का साथ अब लेकिन निभाने तो नहीं वाला — Shivam Raahi Badayuni