उम्मीद नहीं कोई हमें याद करोगेऐसा है मिरा ज़ख़्म के बर्बाद करोगेहै बात ख़मोशी की उदासी की हमारीक्या आप हमें दर्द से आज़ाद करोगे— Shivam Raahi Badayuni