आप को अब हाल अपना मैं बताना चाहता हूँ
ज़िंदगी भर दुख मिला है वो सुनाना चाहता हूँ
कौन उन लोगों से जा कर जीत पाया है यहाँ पे
आप को मैं उन ही लोगों से बचाना चाहता हूँ
ये उदासी कब मिरा पीछा भला छोड़ेगी आख़िर
एक मुद्दत से मैं भी अब मुस्कुराना चाहता हूँ
कौन जा कर कर गया ख़ामोश उन अब बस्तियों को
फिर से मैं उन बस्तियों को अब हँसाना चाहता हूँ
— Shivam Raahi Badayuni















