हर शख़्स पर चेहरे मुझे दिखने लगे
हर शख़्स अब ठहरे मुझे दिखने लगे
भरते नहीं हैं ज़ख़्म मरहम भी लगा
हैं ज़ख़्म सब गहरे मुझे दिखने लगे
उम्मीद भर कोई नज़र आता नहीं
हैं हर जगह पहरे मुझे दिखने लगे
मुझ को कहा था कल किसी ने मौत है
दरिया सभी गहरे मुझे दिखने लगे
— Shivam Raahi Badayuni















