ज़िंदगी इस क़दर कोई ऐलान कर

रंज जितने बदन-पोश नुक़सान कर

क़ैद मैं हूँ मुझे कोई आज़ाद कर
आज उम्मीद हैं मौत ज़िंदान कर

एक अब बस यहीं कोई उम्मीद है
ग़ैर मुझ को बता और अनजान कर

अब उन्हें ही दिखा हाल राही तू ही
अश्क ऐसा दिखा और हैरान कर

इस क़दर आँख में अश्क है अब गिराँ
ज़िंदगी फिर दफ़ा कोई बे-ध्यान कर

आप अब तक रहे दोस्त दिल मैं मिरा
दिल-कुशा उम्र भर कोई बे-जान कर

और दिल वो हमारा ही सब कुछ नहीं
जिस्म का डर हमारा ही वीरान कर

— Shivam Raahi Badayuni

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