चेहरा इधर हमारा उतरता चला गया
वो और भी ज़ियादा निखरता चला गया
बस एक दिल की हम से हिफ़ाज़त नहीं हुई
दिल और भी मिरा ये बिखरता चला गया
वो वक़्त की हवा थी मुझे साथ ले उड़ी
मैं भी हवा के साथ गुजरता चला गया
किरदार मुझ से और निभाया नहीं गया
ये दुख मिरा था और उभरता चला गया
हम को भी शौक़ था कि उड़ेंगे जहाँ में हम
अपनी उड़ान कोई कतरता चला गया
— Shivam Raahi Badayuni















