किसी क़ीमत तुझे इस दिल में लाने तो नहीं वाला

लगा जो दाग़ इस दिल पर है जाने तो नहीं वाला

भले ही ख़त्म हो जाए ये क़िस्सा तेरा मेरा अब
तिरी तस्वीर को मैं अब जलाने तो नहीं वाला

उठाए रखना है ता उम्र मुझ को ख़ामुशी दिल में
ख़ुशी का बोझ अब दिल से उठाने तो नहीं वाला

भले ही सूख जाए अब मिरी इन आँखों का पानी
तिरी ख़ातिर कभी आँसू बहाने तो नहीं वाला

तिरी ख़ातिर हुआ है ख़ाक मेरे घर का हर कोना
तिरी ख़ातिर कभी घर को सजाने तो नहीं वाला

मुझे मालूम होता है तुम्हारा दर्द भी ग़म भी
सुनो आँखों तुम्हें मैं अब रुलाने तो नहीं वाला

निभा कर साथ मैं उस का बड़ा पछता रहा हूँ अब
किसी का साथ अब लेकिन निभाने तो नहीं वाला

— Shivam Raahi Badayuni

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