और फिर तय ये हुआ चेहरा नहीं देखेंगेजाने वालों का कभी रस्ता नहीं देखेंगेआज चढ़ जा तू ये ऊँचाई कि अब मंज़िल परकल भला लोग तुझे बढ़ता नहीं देखेंगे— Shivam Raahi Badayuni