सभी ज़ख़्म उन के छुपाते रहेंगे
यही ग़म हमें अब सताते रहेंगे
भरे ज़ख़्म कहते रहें चीख़ कर के
इन्हें फूल कब तक बताते रहेंगे
हमें ज़िंदगी से शिकायत नहीं है
यही बात ख़ुद को सुनाते रहेंगे
मिरे पास कुछ भी बचा ही नहीं है
बचे ख़्वाब तेरे जलाते रहेंगे
— Shivam Raahi Badayuni















