बस इस लिए ही हम ने फिर दुश्मनी नहीं की
ये शुक्र मानो हम ने बस ख़ुद-कुशी नहीं की
चुप-चाप ही हमेशा रोया है अपना दुखड़ा
हम ने कभी बुराई बस आप की नहीं की
इस शहर में हमेशा अंजान ही रहें हम
हम से किसी ने मिल के फिर दोस्ती नहीं की
सब कुछ लुटा दिया था उस एक शख़्स पे पर
वैसी कभी भी अपनी ये ज़िन्दगी नहीं की
हम को वो छोड़ कर के एहसान कर गया है
हम ने किसी से फिर बस ये दिल-लगी नहीं की
— Shivam Raahi Badayuni















