बनाने में जिस को ज़माने लगे
वहीं आज घर क्यूँ पुराने लगे
कभी कोई रोता नहीं ठीक से
सभी लोग आँसू छुपाने लगे
हमें टूट कर थी मोहब्बत मगर
ये कहने में तुम से जमाने लगे
हमें देख कर लोग जीते थे जो
वहीं लोग हम को भुलाने लगे
ज़रा देर बैठा हुआ था उदास
मुझे दोस्त आ कर हँसाने लगे
हमीं ने दिया था ठिकाना जिन्हें
हमीं को ठिकाने लगाने लगे
— Shivam Raahi Badayuni















