बदन जलने लगा था जब मिरा आहिस्ता-आहिस्ता
लगा उस ने मुझे मरहम दिया आहिस्ता-आहिस्ता
मुझे लगता भरेगा ज़ख़्म ये आहिस्ता-आहिस्ता
तभी ये ज़ख़्म बढ़ने था लगा आहिस्ता-आहिस्ता
चला आया बिना उस से मिले मैं जंग पर ऐ दोस्त
ख़बर मरने की देना तो ज़रा आहिस्ता-आहिस्ता
मुझे तुम जिस तरह हो छोड़कर ख़ुश आज मेरी जाँ
तुम्हें पागल न कर दे बद-दु'आ आहिस्ता-आहिस्ता
जहाँ मैं था वहाँ ग़म है जहाँ तुम थे धुआँ है अब
करेगा ज़ख़्म ये मेरा हरा आहिस्ता-आहिस्ता
— Shivam Raahi Badayuni















