हम भला इन नज़रों से क्या देखते
आप गर होते तो दुनिया देखते
लौटने का तू इरादा करता तो
हम तिरा ता-उम्र रस्ता देखते
उस की शादी भी करा कर आ गए
कब तलक उस को यूँ तन्हा देखते
उस की सूरत सिर्फ़ आती है नज़र
जब भी आईने में चेहरा देखते
आग ख़ुद को ही लगाकर आ गए
किस तरह हम घर ये जलता देखते
आपने देखी हैं ख़ुशियाँ चेहरे पर
इक नज़र ये चेहरा उतरा देखते
ख़्वाब देखा भी तो तुम ने इश्क़ का
ख़्वाब कम से कम तो अच्छा देखते
— Shivam Raahi Badayuni















