
हमारा ग़म हमारे ही बदन मैं पल रहा कैसे
अभी तक वो दिया आँधी में इतना जल रहा कैसे
कही वो थक चुका होगा बशर चलते हुए इतना
बिना ही प्यास के उस का सहारा चल रहा कैसे
— Shivam Raahi Badayuni
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