नया सपना दिखाया जा रहा है
हमें धोखे में लाया जा रहा है
यक़ीनन पहली फ़ुरसत में जलेगा
मिरे घर को सजाया जा रहा है
हवा की ज़द पे जो रक्खा हुआ था
वही दीपक जलाया जा रहा है
दुहाई दे रहा था जो मदद की
उसी पर ज़ुल्म ढाया जा रहा है
दिलों में नफ़रतें बढ़ने लगी हैं
मुहब्बत को मिटाया जा रहा है
मिरे भारत को ये क्या हो गया है
लहू हर सू बहाएा जा रहा है
मिरे बच्चे अदब तक भूल बैठे
सबक़ ऐसा पढ़ाया जा रहा है
समझ जाओ सियासत को रफ़ीक़ो
हमें चूना लगाया जा रहा है
— Shivang Tiwari















