लकीरों में मेरी सलामत हैं कुछ लोगयक़ीनन ख़ुदा की इनायत हैं कुछ लोगजभी दिन ढला, रौशनी बन गए वोमिले ज़िन्दगी में मुहब्बत हैं कुछ लोग— Shubham Mishra