इक रिश्ते के धागे टूटे
मंज़िल टूटी रस्ते टूटे
उस ने मुझ से रिश्ता जोड़ा
उस के सारे रिश्ते टूटे
इश्क़ तो फिर भी होगा हम को
बिखरे बिगड़े चाहे टूटे
ये सब शा'इरी सुनने वाले
ये भी कहीं से होंगे टूटे
ऑंखें खुल गई देख के उस को
और किसी के चश्में टूटे
तू क्या मेरे सामने आया
मेरे लुक़्में लहजे टूटे
वो भी हमारा हो के टूटा
हम भी उस के हो के टूटे
टूटे दिल का दर्द है ऐसा
जैसे अंदर शीशे टूटे
— Simar Gozra















