Simar Gozra

Simar Gozra

@simargozra

Simar Gozra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Simar Gozra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

ज़ख़्म आया है तो यक़ीनन ही मरहम-ए-इंदिमाल भी होगा — Simar Gozra
हम भी अपने घर के चराग़ रौशन करते परिंदों को घर देते कि बाग़ रौशन करते — Simar Gozra
लोग तो इस को धोखा जुदाई दर्द फ़िराक़त मानते हैं बस हम शाइ'र ही है मुहब्बत को जो मुहब्बत मानते हैं — Simar Gozra
थोड़ा नहीं सारे का सारा टूटा है मेरे दिल तक पूरा रस्ता टूटा है — Simar Gozra
वही तो दिन था जब था छोड़ा उस ने फिर मनाया तब से मैं ने जन्मदिन नहीं — Simar Gozra
मरे पड़े थे वैसे भी हालात से हम तुम को भी तो खो बैठे थे हाथ से हम — Simar Gozra
जब मस्तक पर ही लिख दी थी अँधेरे की लौ तो फिर हम क्या उस का सुहाग रौशन करते — Simar Gozra
साथ नहीं है इसीलिए हम होश में हैं वो साथ होता तो हम हैरत में होते — Simar Gozra
अब मेरे पास कुछ भी मेरा नहीं जाँ थी इक वो भी ले गया कोई — Simar Gozra
रख लिया जाए या फ़ना किया जाए इस तबीयत का बोलो क्या किया जाए — Simar Gozra
उस की इक तस्वीर पड़ी है बटुए में जिस को देख के मेरा गुज़ारा होता है — Simar Gozra
सुना कि वो गुज़रे तो बारिश होती है ऐसा है तो सहरा में बौछार करे — Simar Gozra
बात जब उस पेड़ से होने लगी सुनके उस के पत्ते भी झड़ने लगे — Simar Gozra

Ghazal

Nazm

"अच्छा लड़का" मुझ को उस का होना है ऐसा समझो रोना है उस सेे ही मुहब्बत थी उस को ये बताना था उस सेे अब छुपाना है वो जो इक समुंदर था उस के और किनारे थे मैं कि ऐसी कश्ती हूँ जिस का वो किनारा था जो भी उस पे मरते थे सारे अच्छे लड़के थे मैं भी अच्छा लड़का हूँ मैं जो उस पे मरता था मैं कि ऐसा क़िस्सा हूँ उस को जो सुनाना था शा'इरी ही करनी थी इश्क़ तो बहाना था उस को पा के समझा मैं प्यार किस को कहते है समझा सारे आशिक़ क्यूँ उस के शहर रहते हैं मैं जो उस के गलियों में रात दिन भटकता था लोग मुझ को पागल भी ऐसे थोड़ी कहते हैं माना मैं के पागल हूँ पर मैं उन सेे अच्छा हूँ वो जो उस पे मर कर भी आँख और पे रखते हैं प्यार प्यार करते जो क्या वो सच में करते हैं क़स में खा के मरने की क्या वो सच में मरते हैं गर वो मेरी होती तो उस को मैं बता देता इश्क़ कैसे करते हैं कैसे इस में मरते हैं गर किसी को मिल जाए यारो उस को कह देना ये 'सिमर' वो लड़का था कल भी उस पे मरता था अब भी उस पे मरता है — Simar Gozra
"मुझ सेे मत पूछो" मुझ सेे मत पूछो मैं कौन हूँ क्या हूँ कैसा हूँ उस ने जैसा बताया है मैं बिल्कुल वैसा हूँ गर वो कहता है कि मैं वफ़ादार हूँ तो मैं हूँ गर कहे मैं बे-वफ़ा हूँ तो फिर उस के जैसा हूँ मैं किसी आशिक़ के स्कूल के बस्ते जैसा हूँ मैं मंज़िल तक जाते हुए टूटे रस्ते जैसा हूँ पहाड़ों से दूर रखो मुझे गुरेज़ है पत्थरों से आसानी से टूट सकता हूँ मैं आईने जैसा हूँ मैं बारिश की उस पहली बूँद जैसा हूँ जिस का निशान नहीं बचता कोई मैं किसी को मेरे बारे में कुछ नहीं बताता तो मेरे बारे में कौन क्या लिखता कोई तुम मेरा पीछा मत करना मुझे ख़ुद नहीं मालूम मैं किधर जाता हूँ लोग इस लिए आसानी से छोड़ देते हैं मुझ को उन्हें मालूम है मैं थामने से बिखर जाता हूँ मैं ख़ुश हूँ जैसा भी हूँ जो भी कर रहा हूँ मैं अपने ज़ख़्मों को नमक से भर रहा हूँ कई अरसे लगे मुझे मोहब्बत में ये समझने में कि मैं अपने आप के साथ कुछ ग़लत कर रहा हूँ — Simar Gozra