सूरज कहता साया क्या है
पानी कहता शीशा क्या है
जिस्म ख़रीदा जा सकता है
और यहाँ पे सस्ता क्या है
जिस के साथ थी रात गुज़ारी
वो अब मेरा लगता क्या है
पास में आ और बात तो कर
मुझ को देख के हँसता क्या है
मंज़िल तक तो तब मैं जाऊँ
पहले बताओ रस्ता क्या है
सागर से तुम बूँद का पूछो
आँख से पूछो दरिया क्या है
— Simar Gozra















