दर्द से दिल लगा रहा हूँ मैं
ज़ख़्म की ओर जा रहा हूँ मैं
देखो रौनक़ ये मेरे चेहरे पर
उस के कूचे से आ रहा हूँ मैं
दिल में जिन के लिए थी वहशत अब
गले उन को लगा रहा हूँ मैं
ज़िंदा इक शख़्स मर गया मुझ
में
ख़ुद को ख़ुद याद आ रहा हूँ मैं
दिल में आँखों में क़दमों में उस के
बे-सबब हर जगह रहा हूँ मैं
हँसता रहता हूँ आज कल जो अब
कुछ न कुछ तो छुपा रहा हूँ मैं
— Simar Gozra















