"मुझ सेे मत पूछो"
मुझ से मत पूछो मैं कौन हूँ क्या हूँ कैसा हूँ
उस ने जैसा बताया है मैं बिल्कुल वैसा हूँ
गर वो कहता है कि मैं वफ़ादार हूँ तो मैं हूँ
गर कहे मैं बे-वफ़ा हूँ तो फिर उस के जैसा हूँ
मैं किसी आशिक़ के स्कूल के बस्ते जैसा हूँ
मैं मंज़िल तक जाते हुए टूटे रस्ते जैसा हूँ
पहाड़ों से दूर रखो मुझे गुरेज़ है पत्थरों से
आसानी से टूट सकता हूँ मैं आईने जैसा हूँ
मैं बारिश की उस पहली बूँद जैसा हूँ
जिस का निशान नहीं बचता कोई
मैं किसी को मेरे बारे में कुछ नहीं बताता
तो मेरे बारे में कौन क्या लिखता कोई
तुम मेरा पीछा मत करना
मुझे ख़ुद नहीं मालूम मैं किधर जाता हूँ
लोग इस लिए आसानी से छोड़ देते हैं मुझ को
उन्हें मालूम है मैं थामने से बिखर जाता हूँ
मैं ख़ुश हूँ जैसा भी हूँ जो भी कर रहा हूँ
मैं अपने ज़ख़्मों को नमक से भर रहा हूँ
कई अरसे लगे मुझे मोहब्बत में ये समझने में
कि मैं अपने आप के साथ कुछ ग़लत कर रहा हूँ















