मैं नहीं चाहता वो मुझ को इज़हार करेगर मैं करूँ तो फिर वो क्यूँ इनकार करेउस को चाहने वालों मुझ से पूछो तुमवो मर जाए जो भी उस से प्यार करेसुना कि वो गुज़रे तो बारिश होती हैऐसा है तो सहरा में बौछार करेचाहत रखने से नई लैला मिल जातीकोई मजनू के जैसा भी प्यार करे— Simar Gozra